एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL]

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL]: छात्रों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत

भारतीय शिक्षा प्रणाली में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] (EMRS) एक महत्वपूर्ण पहल है जो आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य रखती है। इस लेख में हम एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे और इसके महत्व को समझेंगे।

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] का अर्थ:

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] भारत सरकार द्वारा आदिवासी छात्रों के शिक्षा में समानता और सुधार के लिए शुरू की गई एक योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य रूपरेखा विकसित करना है जिसमें छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार किया जा सके।

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] के लाभ:

  1. शिक्षा का स्तर: इन विद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए एक मानक स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है।
  2. सामाजिक और आर्थिक समानता: यहाँ आदिवासी छात्रों को समान अवसर मिलते हैं और उन्हें उच्च शिक्षा की दिशा में एक प्लेटफार्म मिलता है।
  3. विकास का संचार: इन विद्यालयों में छात्रों का संपूर्ण विकास के साथ-साथ उनका सामाजिक और आर्थिक विकास भी किया जाता है।
  4. कला और सांस्कृतिक कार्यक्रम: यहाँ कला, सांस्कृतिक गतिविधियों, खेल-कूद और अन्य सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जो छात्रों के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में मदद करते हैं।
  5. उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली: इन विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली का अनुसरण किया जाता है जो छात्रों को विशेष ज्ञान और कौशलों के साथ संस्कृति, धर्म, ताकि वे एक समृद्ध और समझदार नागरिक बन सकें।

 

भारत में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की संख्या नियमित रूप से बदलती रहती है। इन विद्यालयों की संख्या में वृद्धि होती रहती है जब नई शाखाओं की स्थापना होती है या पूर्व में स्थापित विद्यालयों में नयी कक्षाएँ जोड़ी जाती हैं। वर्तमान समय में, भारत में लगभग 700 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय हैं।

भारत में कितने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय हैं?

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 1987 में की गई थी। इसकी मूल उद्देश्य आदिवासी जनजातियों के शिक्षा के क्षेत्र में समानता और सुधार को प्रोत्साहित करना था।

यह एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की सृजनात्मक पहल थी जो आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने के लिए थी। इसके बाद, इन विद्यालयों की संख्या बढ़ती गई और आज के समय में ये भारत के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं और छात्रों को विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की शुरुआत कब हुई?

भारत में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की संख्या नियमित रूप से बदलती रहती है। इन विद्यालयों की संख्या में वृद्धि होती रहती है जब नई शाखाओं की स्थापना होती है या पूर्व में स्थापित विद्यालयों में नयी कक्षाएँ जोड़ी जाती हैं। वर्तमान समय में, भारत में लगभग 700 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय हैं। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 1987 में की गई थी।

इसकी मूल उद्देश्य आदिवासी जनजातियों के शिक्षा के क्षेत्र में समानता और सुधार को प्रोत्साहित करना था। यह एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की सृजनात्मक पहल थी जो आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने के लिए थी। इसके बाद, इन विद्यालयों की संख्या बढ़ती गई और आज के समय में ये भारत के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं और छात्रों को विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

निष्कर्ष:

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल विद्यालय [EKLAVYA MODEL RESIDENTIAL SCHOOL] एक ऐसी महत्वपूर्ण पहल है जो आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने में मदद करती है। इन विद्यालयों में शिक्षा के

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